मऊगंज जिले के ग्राम पंचायत सीतापुर बस स्टैंड (पीडब्ल्यूडी मंदिर परिसर) में चल रहे अतिक्रमण को लेकर ग्रामीणों की नाराज़गी बढ़ती जा रही है। यह स्थान भगवान का मंदिर है, जहां हिंदू समाज की आस्था जुड़ी हुई है। ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव ने बाकायदा पत्र जारी कर अतिक्रमण हटाने की मांग की है। इतना ही नहीं, कई ग्रामीणों ने भी इस पर हस्ताक्षर कर प्रशासन से कार्रवाई की गुहार लगाई है। लेकिन विडंबना यह है कि लंबे समय से मीडिया में लगातार खबरें प्रकाशित होने और अधिकारियों द्वारा कार्रवाई के आश्वासन देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यहां तक कि तहसीलदार के ट्रांसफर के बाद उम्मीद जगी थी कि नए पदस्थ अधिकारी तत्काल कार्रवाई करेंगे, लेकिन मामला अब तक ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। लोगों का सवाल है कि आखिर क्यों इस अतिक्रमण को हटाने में प्रशासनिक अधिकारियों को पसीना छूट रहा है? क्या कहीं राजनीतिक दबाव है, या फिर कोई और वजह? ग्रामीणों का मानना है कि जब बात भगवान के मंदिर स्थल की हो, तब प्रशासन को किसी भी प्रकार का दबाव न मानते हुए निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर भगवान का स्थान ही सुरक्षित नहीं रहेगा, तो आम जन की समस्याओं का हल प्रशासन से कैसे अपेक्षित किया जा सकता है? यह केवल अतिक्रमण का मुद्दा नहीं है, बल्कि आस्था और विश्वास का मामला है, जिसे लेकर जिला प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में मांग की है कि प्रशासन तुरंत अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही करे और मंदिर की पवित्रता को बनाए रखे। अब देखना यह है कि जिले के अधिकारी इस गंभीर मामले को लेकर कितनी गंभीरता दिखाते हैं और कब तक भगवान के स्थान से अतिक्रमण हटवाते हैं।















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